कानू सान्याल को क्रांतिकारी अभिवादन। योद्धा जिंदगी और मौत दोनों से समान व्यवहार करता है। कानू दा योद्धा थे। वे योद्धा की तरह जिए और इस भौतिकवादी स्वार्थी दुनिया से रवानगी के लिए उन्होंने योद्धा की तरह ही अपनी मौत का रास्ता खुद चुन लिया। प्रकृति आपको जीने का नैसर्गिक अधिकार देती है और मरने का भी... इस पर किसी भी बहस का मतलब नहीं, क्योंकि घिसट कर जीने का भी कोई मतलब नहीं...
Saturday, 27 March 2010
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