पैसा बहा कर रोक रहे हैं धार
यूपी को विद्युत-राजधानी बनाने की परियोजना कॉरपोरेट-रेस में उलझी
उत्तर प्रदेश को देश की विद्युत राजधानी बनाने की पहल 'कॉरपोरेट-प्रतिद्वंद्विता' के पेच में फंस गई है। विश्व के सबसे बड़े गैस आधारित बिजली प्रोजेक्ट को कानूनी पेचीदगियों में उलझाए रखने के लिए पैसे इस तरह अनाप-शनाप खर्च किए जा रहे हैं कि समानान्तर 'पैसा बहाओ प्रोजेक्ट' खड़ा होता जा रहा है। दादरी विद्युत परियोजना बनाम दादरी पैसा बहाओ परियोजना। अनिल धीरू भाई अम्बानी समूह की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सामने कॉरपोरेट मुश्किलें चाहे जो भी खड़ी की जा रही हों, लेकिन ये रोड़े दादरी के उन किसानों के नाम पर खड़े किए जा रहे हैं, जिनकी जमीनें इस परियोजना के लिए अधिग्रहीत की गई थीं। किसानों की तरफ से कानूनी लड़ाई लड़ने के नाम पर बहाए जा रहे अनाप-शनाप धन पर आयकर विभाग की निगाह टिक गई है। सूत्रों का कहना है कि आयकर विभाग ने इसकी जांच शुरू भी कर दी है।
दादरी के किसानों की कानूनी लड़ाई आखिर कौन लड़ रहा है? किसान खुद या पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह? किसान खुद या फिल्म अभिनेता राज बब्बर? कानूनी लड़ाई के नाम पर हाई-रेटेड वकील-शृंखला की फीस, चार्टर प्लेन के शाहंशाहाना आवागमनों व अन्य आलीशान खर्चे कौन उठा रहा है? किसान खुद या वीपी सिंह या कि राज बब्बर? या कोई और? यह और कौन है? कॉरपोरेट-प्रतिद्वंद्विता की डोर थामे कोई समानान्तर पूंजी बिरादर या कोई धनपशु राजनीतिक?
सनद रहे, 16 जून 2004 को रिलायंस इनर्जी और उत्तर प्रदेश सरकार ने साझा तौर पर गाजियाबाद के दादरी में 3740 मेगावाट गैस आधारित विद्युत परियोजना शुरू किए जाने की घोषणा की थी। इस परियोजना में अकेले उत्तर प्रदेश को कुल उत्पादन का 40 फीसदी यानी 1500 मेगावाट बिजली देने का प्रस्ताव था। दादरी में जमीन का अधिग्रहण भी हो गया लेकिन पूरी परियोजना राजनीति-पोषित कॉरपोरेट पेचोखम में उलझा कर रख दी गई।
बहरहाल, आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया पैसे बहाए जाने का सूरते हाल। बीते पांच मार्च को दादरी प्रकरण में पैरवीकार वकीलों का जो जत्था इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा उसे बाकायदा चार्टर प्लेन (वीटी-एसआरसी) से लाया गया था। प्लेन किसका था? सूत्र बताते हैं कि यह विमान दुनियाभर में मशहूर एक फैशन डिजाइनर के पति का था। मुम्बई में पंचसितारा ओबेरॉय होटल से लेकर इलाहाबाद की हवाबाजियों का खर्च कौन वहन कर रहा है? क्या वीपी सिंह? निश्चित तौर पर नहीं... क्योंकि दादरी परियोजना के लिए हुए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ वीपी सिंह की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (संख्या: 8968/2008) दाखिल है। दादरी के सीमित आयवर्ग के 21 किसानों की ओर से आठ याचिकाएं और ऐसे ही कुछ अन्य किसानों की ओर से 19 याचिकाएं दाखिल हैं। दादरी परियोजना के खिलाफ लड़ी जा रही कानूनी लड़ाई के पीछे किसान हैं तो हाई प्रोफाइल वकीलों पर किए जा रहे अनाप-शनाप खर्च के पीछे कौन है? मामले की जांच करने वाले आयकर अधिकारी इस सवाल का जवाब तलाशने में लगे हैं।
उल्लेखनीय है कि अनिल अम्बानी समूह के खिलाफ 32 मामलों के वकील हाईप्रोफाइल अधिवक्ता केटीएस तुलसी और उनकी भारी-भरकम टीम है। इनमें 29 मामले अकेले इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहे हैं। दो मामले मुम्बई में और एक मामला दिल्ली हाईकोर्ट में है। इनमें रिलायंस पावर आईपीओ के खिलाफ मुम्बई में चल रहा मामला भी शामिल है।
Published in Daily News Activist on March 10, 2008 (Scanned copy of news is attached)
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