Tuesday, 11 March 2008

पैसा बहा कर रोक रहे हैं धार

पैसा बहा कर रोक रहे हैं धार
 
यूपी को विद्युत-राजधानी बनाने की परियोजना कॉरपोरेट-रेस में उलझी
 
 
उत्तर प्रदेश को देश की विद्युत राजधानी बनाने की पहल 'कॉरपोरेट-प्रतिद्वंद्विता' के पेच में फंस गई है। विश्व के सबसे बड़े गैस आधारित बिजली प्रोजेक्ट को कानूनी पेचीदगियों में उलझाए रखने के लिए पैसे इस तरह अनाप-शनाप खर्च किए जा रहे हैं कि समानान्तर 'पैसा बहाओ प्रोजेक्ट' खड़ा होता जा रहा है। दादरी विद्युत परियोजना बनाम दादरी पैसा बहाओ परियोजना। अनिल धीरू भाई अम्बानी समूह की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सामने कॉरपोरेट मुश्किलें चाहे जो भी खड़ी की जा रही हों, लेकिन ये रोड़े दादरी के उन किसानों के नाम पर खड़े किए जा रहे हैं, जिनकी जमीनें इस परियोजना के लिए अधिग्रहीत की गई थीं। किसानों की तरफ से कानूनी लड़ाई लड़ने के नाम पर बहाए जा रहे अनाप-शनाप धन पर आयकर विभाग की निगाह टिक गई है। सूत्रों का कहना है कि आयकर विभाग ने इसकी जांच शुरू भी कर दी है।
 
दादरी के किसानों की कानूनी लड़ाई आखिर कौन लड़ रहा है? किसान खुद या पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह? किसान खुद या फिल्म अभिनेता राज बब्बर? कानूनी लड़ाई के नाम पर हाई-रेटेड वकील-शृंखला की फीस, चार्टर प्लेन के शाहंशाहाना आवागमनों व अन्य आलीशान खर्चे कौन उठा रहा है? किसान खुद या वीपी सिंह या कि राज बब्बर? या कोई और? यह और कौन है? कॉरपोरेट-प्रतिद्वंद्विता की डोर थामे कोई समानान्तर पूंजी बिरादर या कोई धनपशु राजनीतिक?
 
सनद रहे, 16 जून 2004 को रिलायंस इनर्जी और उत्तर प्रदेश सरकार ने साझा तौर पर गाजियाबाद के दादरी में 3740 मेगावाट गैस आधारित विद्युत परियोजना शुरू किए जाने की घोषणा की थी। इस परियोजना में अकेले उत्तर प्रदेश को कुल उत्पादन का 40 फीसदी यानी 1500 मेगावाट बिजली देने का प्रस्ताव था। दादरी में जमीन का अधिग्रहण भी हो गया लेकिन पूरी परियोजना राजनीति-पोषित कॉरपोरेट पेचोखम में उलझा कर रख दी गई।
 
बहरहाल, आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया पैसे बहाए जाने का सूरते हाल। बीते पांच मार्च को दादरी प्रकरण में पैरवीकार वकीलों का जो जत्था इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा उसे बाकायदा चार्टर प्लेन (वीटी-एसआरसी) से लाया गया था। प्लेन किसका था? सूत्र बताते हैं कि यह विमान दुनियाभर में मशहूर एक फैशन डिजाइनर के पति का था। मुम्बई में पंचसितारा ओबेरॉय होटल से लेकर इलाहाबाद की हवाबाजियों का खर्च कौन वहन कर रहा है? क्या वीपी सिंह? निश्चित तौर पर नहीं... क्योंकि दादरी परियोजना के लिए हुए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ वीपी सिंह की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (संख्या: 8968/2008) दाखिल है। दादरी के सीमित आयवर्ग के 21 किसानों की ओर से आठ याचिकाएं और ऐसे ही कुछ अन्य किसानों की ओर से 19 याचिकाएं दाखिल हैं। दादरी परियोजना के खिलाफ लड़ी जा रही कानूनी लड़ाई के पीछे किसान हैं तो हाई प्रोफाइल वकीलों पर किए जा रहे अनाप-शनाप खर्च के पीछे कौन है? मामले की जांच करने वाले आयकर अधिकारी इस सवाल का जवाब तलाशने में लगे हैं।
 
उल्लेखनीय है कि अनिल अम्बानी समूह के खिलाफ 32 मामलों के वकील हाईप्रोफाइल अधिवक्ता केटीएस तुलसी और उनकी भारी-भरकम टीम है। इनमें 29 मामले अकेले इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहे हैं। दो मामले मुम्बई में और एक मामला दिल्ली हाईकोर्ट में है। इनमें रिलायंस पावर आईपीओ के खिलाफ मुम्बई में चल रहा मामला भी शामिल है।
 
Published in Daily News Activist on March 10, 2008 (Scanned copy of news is attached)
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Wednesday, 5 March 2008

सेनाध्यक्ष ने दबा दी सीबीआई की फाइल

सेनाध्यक्ष ने दबा दी सीबीआई की फाइल

जनरल के करीबी होने का फायदा लेफ्टिनेंट जनरल गौतम दत्ता को, विजिलेंस-सीबीआई नाकारा साबित

प्रभात रंजन दीन

थलसेना अध्यक्ष जनरल दीपक कपूर का खास होने के कारण रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय ने मध्य कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल गौतम दत्ता के खिलाफ केंद्रीय सतर्कता आयोग और सीबीआई की रिपोर्ट दबा रखी है। अकूत संपत्ति जमा करने के मामले में विजिलेंस और सीबीआई की जांच रिपोर्ट आखिरी कार्रवाई के लिए रक्षा मंत्रालय को पेश की गई थी। मंत्रालय ने उसे सेना मुख्यालय भेज दिया और सेना मुख्यालय में फाइल दबा दी गई। साफ है कि सेनाध्यक्ष ने फाइल दबवा दी। जनरल दीपक कपूर लेफ्टिनेंट जनरल गौतम दत्ता के इतने अंतरंग हैं कि उन्हें सेना की इंजीनियरिंग कोर का चीफ बनाने की हठ ठाने बैठे हैं।
सेना में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाने की वजह से दरकिनार किए गए लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग का मध्य कमान के दागदार ओहदेदारों के बीच स्वागत है। पनाग को नहीं मालूम कितने दागी अफसरों को इस कमान में पनाह मिली हुई है। मध्य कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल गौतम दत्ता भी उनमें से एक हैं। जो जितना दागदार वह उतना ही ओहदेदार। आय से अधिक सम्पत्ति जमा करने के मामले में ले. जनरल दत्ता के खिलाफ सेंट्रल विजिलेंस कमीशन ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। सीबीआई जांच की रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को पेश हुई। रक्षा मंत्रालय ने सेना मुख्यालय से मंतव्य मांगा, लेकिन सेना मुख्यालय में फाइल दबा दी गई। सीबीआई भी इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं ले रही है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग से कानूनी परामर्श की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जांच रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय के विशेष प्रकोष्ठ को आखिरी निर्णय लेने के लिए पेश कर दी गई थी लेकिन उसे सेनाध्यक्ष के पास भेज दिया गया। कार्रवाई के लिए रक्षा मंत्रालय को दो महीने का समय दिया गया था, लेकिन समय-सीमा को ताक पर रख दिया गया।
सनद रहे, इन्कमटैक्स विभाग ने लेफ्टिनेंट जनरल गौतम दत्ता के कोलकाता में डीबी-9, सेक्टर-9, सॉल्ट लेक स्थित आवास और 19/1- बंडेल रोड स्थित गैस एजेंसी से बड़ी तादाद में महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए थे, जिनसे उनकी अकूत सम्पत्ति का खुलासा हुआ था। गैस एजेंसी लेफ्टिनेंट जनरल गौतम दत्ता की पत्नी नूपुर दत्ता की है। बरामद दस्तावेजों में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के बड़ी संख्या में वाउचर्स, कैश डिपॉजिट स्लिप्स के अलावा ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और हांगकांग एंड सिंगापुर बैंक के खाते के दस्तावेज शामिल हैं। इसमें आईसीआईसीआई बैंक का खाता (नम्बर: 000501522312) पुणे स्थित बंद गार्डन रोड ब्रांच और हांगकांग एंड सिंगापुर बैंक का खाता (नम्बर: 023609415-006) कोलकाता के रमानी चटर्जी रोड ब्रांच का पाया गया। इन्कमटैक्स अधिकारियों ने हांगकांग एंड सिंगापुर बैंक का क्रेडिट कार्ड (नम्बर: 4384599908667834) भी बरामद किया था।
मध्य कमान में ऐसे कई घोटालों, बलात्कारों, डकैतियों, चोरियों, कब्जों, राष्ट्रद्रोही हरकतों और जालसाजियों का खुलासा होता रहा है। अभी हाल ही खतरनाक सैन्य आयुधों की आपराधिक हेराफेरी का मामला उजागर हुआ था। आपको एक बार फिर याद दिला दें, 23वीं इन्फैंट्री डिवीजन के मेजर आनंद कुमार ने सैन्य आग्नेयास्त्रों की तस्करी में आला अधिकारियों की मिलीभगत का दस्तावेजी खुलासा किया था। भ्रष्ट अधिकारियों ने एकजुट होकर मेजर आनंद को पागल घोषित कर दिया। उसे सीखचों में जकड़ कर यहीं लखनऊ मुख्यालय में नजरबंद रखा गया। बर्बरतापूर्वक पिटाई की जाती रही। जबरन मिर्गी की दवा दी जाती रही। तीन साल तक सिविल जेल में बंद रखा गया और आखिरकार नौकरी से निकाल दिया गया। सैन्य आयुध घोटाले के बारे में मेजर आनंद ने कमांडिंग अफसर, जीओसी, जीओसी इन सी से लेकर सेनाध्यक्ष तक को आधिकारिक तौर पर इत्तला की थी। घोटाले की फाइलें सेना मुख्यालय में सड़ गईं और घोटालेबाज अधिकारियों ने मेजर आनंद की जिंदगी सड़ा दी।
इसी मध्य कमान में तत्कालीन जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल डीएस चौहान, उनकी पत्नी मीरा चौहान, तत्कालीन ब्रिगेड कमांडर संजीव मदान, कई अन्य सेनाधिकारियों और फौजियों द्वारा छावनी क्षेत्र की एक आलीशान कोठी पर कब्जा और लूटपाट किए जाने के खिलाफ डकैती का मुकदमा तक दर्ज हो चुका है। लखनऊ मुख्यालय में सेना में भर्ती के लिए आए पचासों बच्चों की सेप्टिक टैंक में डूब कर दुखद मौत की घटना हो चुकी है। लेकिन सीमेंट गारा तक खा जाने वाले गैरीसन अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी कमान मुख्यालय में एक सैनिक की बिटिया से बलात्कार करने वाले अधिकारी मेजर रैना को बेसाख्ता बरी किया जा चुका है और यहीं से संवेदनशील सूचनाओं वाले कम्प्यूटर चुराए जा चुके हैं। एक लम्बे अर्से तक यह कमान आईएसआई गतिविधियों का केंद्र बना रहा है और मेजर स्तर से लेकर कई अधिकारी-फौजी गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं। यहां के अफसर फौजियों के वेतन के लिए आए लाखों रुपए उड़ाने तक की हरकतें कर चुके हैं। लेकिन इन सब मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की गई। आईएसआई मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी हुई लेकिन राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को संरक्षण देने वाले छावनी क्षेत्र में अड्‌डा जमाए उन अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जो ऊंची पहुंच वाले थे या काफी पैसे वाले।
भ्रष्टाचार के खिलाफ असरकारक विरोध दर्ज कराने की वजह से ही भारतीय सेना के सबसे सक्रिय और संवेदनशील उत्तरी कमान के सेनापति लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग को वहां से हटा दिया गया। देश की राजनीतिक-प्रशासनिक-सैनिक व्यवस्था किस स्तर के लोगों के हाथ में है, यह जनरल पनाग के तबादला प्रकरण से एक बार फिर उजागर हुआ है। अब जनरल पनाग को मध्य कमान का सेनाध्यक्ष बनाया गया है।
अपने देश की लोकतांत्रिक-अराजकता का परिदृश्य देखिए... सियाचिन से लेकर करगिल समेत पाकिस्तान की सबसे संवेदनशील सीमा की निगरानी रखने वाले उत्तरी कमान में पांच हजार करोड़ का राशन घोटाला हुआ। सैनिकों के लिए आया राशन खुले बाजार में बिकता पाया गया। सेना के अफसरों ने सैनिकों के लिए आने वाले अंडे और टेंट वगैरह भी बेच डाले। घोटाले उस समय हुए जब मौजूदा थलसेनाध्यक्ष जनरल कपूर उत्तरी कमान के कमांडर हुआ करते थे। जनरल कपूर से कार्यभार लेने वाले ले. जनरल पनाग ने सख्त कार्रवाइयां शुरू कीं, लेकिन कोई ठोस नतीजा निकले उसके पहले ही लेफ्टिनेंट जनरल पनाग को वहां से निबटा दिया गया। पनाग को हटा कर उत्तरी कमान का प्रभारी उस अधिकारी को बनाया जा रहा है जिस पर पांच हजार करोड़ के राशन घोटाले का सीधा आरोप है। इस अधिकारी का नाम है लेफ्टिनेंट जनरल पीसी भारद्वाज।
अब लेफ्टिनेंट जनरल पनाग को मध्य कमान का जनरल अफसर कमांडिंग इन चीफ बना कर लखनऊ लाया गया है। 'फील्ड एरिया' से 'पीस एरिया' में आने के बावजूद जनरल पनाग को शांति नहीं मिलने वाली। इस 'पीस एरिया' में बड़ी शांति और निश्चिंतता से घोटाले हो रहे हैं और घोटालेबाज अफसरों को यहां पनाह मिल रही है। लिहाजा, यहां 'शंट' किए जाने के बावजूद भ्रष्ट व्यवस्था को जनरल पनाग जैसे अधिकारियों से पनाह नहीं मिलने वाली। मुश्किलें खड़ी होने ही वाली हैं।

Published in Daily News Activist on March 02, 2008 (Scanned copy of news is attached)

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