नक्सलियों ने पिछले दिनों पश्चिम बंगाल में तैनात ईस्टर्न फ्रंटियर राइफल्स (ईएफआर) के दो दर्जन से अधिक जवानों को बर्बर तरीके से मार डाला। यह केवल ईएफआर जवानों की हत्या नहीं थी, बल्कि इसे भारत की नागरिक (सिविल) पुलिस व्यवस्था की हत्या के रूप में देखा जाना चाहिए। ईएफआर राज्य की पुलिस नहीं, यह सीआरपी बीएसएफ की तरह अर्ध सैनिक बल है। पश्चिम बंगाल की इस लहूलुहान घटना के मद्देनजर आप देश की स्थितियों को देखें और उसकी समीक्षा करें... मौके से आई खबरें और चश्मदीदों के बयान से यह साबित हो गया है कि जिन गोलियों की बौछार से ईएफआर के जवान मारे गए, वे गोलियां पश्चिम बंगाल पुलिस की थीं। बंगाल पुलिस की वे गोलियां नक्सलियों द्वारा लूटी हुई नहीं बल्कि बंगाल पुलिस के लोगों द्वारा नक्सली संगठनों तक 'सप्लाई' की गई थीं। घटना के समय बंगाल पुलिस के जवान और अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे और धूर्त दर्शक की भूमिका निभाते रहे...
Friday, 26 February 2010
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